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Showing posts from January, 2020

CHHAPAAK

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कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा है हा ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा है हाथ में अंधेरा और आंख में इरादा कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के हिन्दी ट्रैक्स डॉट इन चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआं बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआं ना होश ना ख्याल सोच अंधा कौन कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए सब झुलस गया कोई चेहरा मिटा के एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया छपाक से पहचान ले गया पहचान ले गया पहचान ले गया

नव वर्ष के पुरान रहस्य

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        कल राजनगर गए थे वहा तो पहले भी बहुत बार गए थे लेकिन इस बार दिल से आवाज आया की इसका इतिहास क्या है इसे कोन बनाया बस ये सब जानने का बरा जल्दी था संयोग से 1 पंडित जी मिले मैं उनसे बैठ के इस महल की सारी कहानिया जानना चाहा वो भी बरे प्यार से सब सुनाने लगे  फिर सोचे ये सब आप सब को भी बता दूँ पर्यटक स्थल  राजनगर मधुबनी जिले का एक एतिहासिक महत्व जगह है। यह एक जमाने में महाराज दरभंगा की उप-राजधानी हुआ करता था। यह मराराजा रामेश्वर सिंह के द्वारा बसाया गया था। उन्होंने यहां एक भव्य नौलखा महल का निर्माण करवाया लेकिन १९३४ के भूकंप में उस महल को काफी क्षति पहुंची और अभी भी यह भग्नावशेष के रूप में ही है। इस महल में एक प्रसिद्ध और जाग्रत देवी काली का मंदिर है जिसके बारे में इलाके के लोगों में काफी मान्यता और श्रद्धा है। जब इस नगर को रामेश्वर सिंह बसा रहे थे उस वक्त वे महाराजा नहीं, बल्कि परगने के मालिक थे। राजा के छोटे भाई और संबंधियों को परगना दे दिया जाता था जिसके मालिक को बाबूसाहब कहा जाता था। बाद में अपने भाई महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की मृत्यु के बाद, र...