बुद्धि माय
मेरा नाम आदर्श है और मैं जयनगर से हूँ ये छोटी से कहानी 6 साल पहले की है जब हम 12th में थे उन दिनों पढ़ाई के वजह से मधुबनी में रहते थे मेरा कुछ दोस्त भी था हम सभी संडे को मिलते थे काली मंदिर के पास एक बहुत ही फैमस लस्सी वाला का दुकान था वही हम लोगो का अड्डा था हम लोग हर संडे साम को वही मिलते थे लस्सी। भी पीते थे और ढेरों बाते भी करते थे एक दिन हम लोग गये वही सब कुर्शी पे बैठ गए लस्सी का भी आर्डर दे दिए और बाते करने लगे तभी एक 75 से 80 साल की बृद्ध महिला हाथों में लाठी ले मेरे सामने खड़ी हो गयी आंखे धंसी हुई थी और बोली बेटा भगवान के नाम पे कुछ दे दो मैं अमूमन इस सब को इग्नोर ही करता रहा हूँ पर पता नही क्यो उस दिन हम अपना पर्स निकाल के सिक्के ढूंढने लगे तभी कुछ दिमाग मे आया और मैं पर्स रख लिया पॉकेट मे और उनसे बोला दादी जी आप लस्सी पीजीएगा जैसे ही मैं उनको दादी जी बोला उनका फेस ही बदल गया और मेरे सारे दोस्त मुझे देखने लगे की कहाँ 4 या 5 रुपया में कहानी खत्म हो जाती अब 30 रुपया खर्च करेगा पहले तो मना करी नही बेटा लेकिन जैदा फोर्स करने पे मान गयी सब के हाथ मे लस्स...