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अधूरा प्यार

लेटा हुआ हूं छत पर । बगल में गाना चल रहा है मेरी पहली मोहब्बत है जानम । यह गाना सुनते ही मन में तुम्हारे प्रति अपार स्नेह उमर आया, इस अपार स्नेह का मतलब तुम याद आ गई । तुम्हें फोन कर लिया और आदत के अनुरूप तुमने फोन नहीं उठाया । मैंने अपने दिल को समझा लिया बुझा लिया और बता दिया कि यह जिंदगी ऐसे ही जी रहा हूँ । अब तुम्हारे फ़ोन उठाने न उठाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन थोड़ा सा तो फर्क पड़ ही जाता है न ! यह कैसे बताऊं मुझे नही पता ।  सोशल मीडिया के जमाने में कहानी के तौर पर मैं ऐसे ही लिख कर खुद को सांत्वना देता रहता हूं । दूर गाना के बोल तेरी वफा तो एक सितम है.... बार-बार तुम्हारी यादों में मुझे लेकर चली जा रही है । फिर याद आया मैं गाना नहीं सुनता । मुझे गाना सुनने का कोई शौक नहीं । या यूँ कह लो मुझे सुनने सुनाने वाला कभी कोई मिला ही नहीं । लेकिन आज पता नहीं दूर बज रहा गाना में मैं तुम्हें ही देख रहा हूं, सुन रहा हूं, समझ रहा हूं और तुमसे ही बातें किए जा रहा हूँ ।  छत की ठंडी हवा के झोंके मन को राहत का संदेश दे रहा है, अच्छा भी लग रहा है लेकिन तुम्हारी याद !!! इधर उधर पलट कर ...

नई शिक्षा नीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी दुवारा लाये गए नए शिक्षा नीति क़ाबलिये तारीफ है नए शिक्षा नीति के आने से कम परीक्षा होगी जैदा मार्क्स लाने का दबाब ना होगा और सब्जेक्ट चुनने में कई परेशानी भी नही होगी जैसे पहले कोई बच्चा आर्ट्स ले के हिस्ट्री या जियोग्राफी पढ़ता था तो लोग ये कहते थे कि साइंस नही पढ़ सकता इसलिए हिस्ट्री या एकाउंट पढ़ रहा है इसमें आप अपने अनुशार बिषय का चयन कर सकते है आप फीजिक्स भी रख सकते है और जियोग्राफी भी..👍 भारत में कई वर्षो से चली आ रही शिक्षा नीति को हाल ही में सम्पूर्ण रूप से बदल दिया गया। सबसे पहले शिक्षा नीति इंदिरा गाँधी जी ने सन 1968 में शुरू किया था। उसके बाद राजीव गाँधी ने भी इसमें ज़रूरी बदलाव किये थे। 1992 में प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव ने भी इसमें ज़रूरी बदलाव किये थे। जैसे की हम देखते है कि कोई भी चीज़ एक जगह पर बहुत वर्षो से पड़ी है, तब उसमे धुल जम जाया करती है, पहले की शिक्षा नीति का हाल भी ठीक कुछ ऐसा ही था। शिक्षा नीति में भी नया परिवर्तन लाया गया। पुराने शिक्षा नीति से शिक्षा और उन्नति की प्रगति कहीं न कहीं रुक गयी थी। केंद्र की मोदी सरकार ने ...

बुद्धि माय

मेरा नाम आदर्श है और मैं जयनगर से हूँ ये छोटी से कहानी 6 साल पहले की है जब हम 12th में थे उन दिनों पढ़ाई के वजह से मधुबनी में रहते थे  मेरा कुछ दोस्त भी था हम सभी संडे को मिलते थे काली मंदिर के पास एक बहुत ही फैमस लस्सी वाला का दुकान था वही हम लोगो का अड्डा था हम लोग हर संडे साम को वही मिलते थे लस्सी। भी पीते थे और ढेरों बाते भी करते थे  एक दिन हम लोग गये वही सब कुर्शी पे बैठ गए लस्सी का भी आर्डर दे दिए और बाते करने लगे तभी एक 75 से 80 साल की बृद्ध महिला हाथों में लाठी ले मेरे सामने खड़ी हो गयी आंखे धंसी हुई थी और बोली बेटा भगवान के नाम पे कुछ दे दो मैं अमूमन इस सब को इग्नोर ही करता रहा हूँ पर पता नही क्यो उस दिन हम अपना पर्स निकाल के सिक्के ढूंढने लगे तभी कुछ दिमाग मे आया और मैं पर्स रख लिया पॉकेट मे और उनसे बोला दादी जी आप लस्सी पीजीएगा  जैसे ही मैं उनको दादी जी बोला उनका फेस ही बदल गया और मेरे सारे दोस्त मुझे देखने लगे की  कहाँ 4 या 5 रुपया में कहानी खत्म हो जाती अब 30 रुपया खर्च करेगा  पहले तो मना करी नही बेटा लेकिन जैदा फोर्स करने पे मान गयी सब के हाथ मे लस्स...

college friends

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PG 4th सेम के exam खत्म होने के बाद ही हम 5 जिगरी दोस्त बिछर गये  हम पाँचो दोस्त मधुबनी जिला के अलग अलग प्रखण्ड से आते है कोई जयनगर तो कोई बासोपट्टी तो कोई कलुआही से तो कोई बेनीपट्टी तो कोई झंझारपुर से आते है..  हम सबको कल कॉलेज मे क्या करना होता उसका प्लान रात को ही बना लेते थे  हम  लोगो के ग्रुप मे सबसे सिनयर नवीन भैया है  ब्लू सर्ट वाले उन्ही को लीडर मानते है हम लोग  उसका नुकसान हमेसा उनको उठाना परता था  कभी पुलिस के पास तो कभी कोल्ड्रिंक शॉप पे जब भी हम लोग ट्रिपल लोडिंग करते पकड़े जाते थे पुलिस से  तो हम लोग नवीन भैया को लीडर बोल के निकल जाते थे बेचारा हमेसा पकड़े जाते थे कभी फाइन देना पड़ता था नही तो कभी बहुत डाट सुनना पड़ा है उनको ... उनका प्रेम कहानी बताता हूँ वो ना अपने ही कॉलेज के किसी भाभी से प्यार कर बैठे जिसकी शादी पहले ही किसी से हो गया था बेचारा 2 साल उनके पीछे कैसे बर्बाद किया हम लोगो से बेहतर कोन जान सकता है  अब उसके बाद अभिसेक जो ब्लू टिसर्ट मे है वैसे तो वो बड़ा सांत सुअभाव का है लेकिन वो का होता है अंदर का घुइया ना ...

गलतियां

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जब इंसान ही नही रहेगा तो उसकी गलतीयो का क्या करेंगे यहाँ चंद मिनटों में ये जिंदगीया  गुजर जाती है पता नही चलता  तो छोड़ देते है ना आगे बढ़ते है

चाय

मैं गर्म चाय का प्रेमी हूँ शराब नही पिऊँगा मैं पब्जी खेल लूँगा पर किसी के दिल से नही खेलूँगा..👍

CHHAPAAK

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कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा है हा ना चाह न चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा है हाथ में अंधेरा और आंख में इरादा कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के हिन्दी ट्रैक्स डॉट इन चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआं बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआं ना होश ना ख्याल सोच अंधा कौन कोई चेहरा मिटा के और आंख से हटा के चंद छींटें उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए आरज़ू थी शौक थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए सब झुलस गया कोई चेहरा मिटा के एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया छपाक से पहचान ले गया पहचान ले गया पहचान ले गया