अधूरा प्यार
लेटा हुआ हूं छत पर । बगल में गाना चल रहा है मेरी पहली मोहब्बत है जानम । यह गाना सुनते ही मन में तुम्हारे प्रति अपार स्नेह उमर आया, इस अपार स्नेह का मतलब तुम याद आ गई । तुम्हें फोन कर लिया और आदत के अनुरूप तुमने फोन नहीं उठाया । मैंने अपने दिल को समझा लिया बुझा लिया और बता दिया कि यह जिंदगी ऐसे ही जी रहा हूँ । अब तुम्हारे फ़ोन उठाने न उठाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन थोड़ा सा तो फर्क पड़ ही जाता है न ! यह कैसे बताऊं मुझे नही पता ।
सोशल मीडिया के जमाने में कहानी के तौर पर मैं ऐसे ही लिख कर खुद को सांत्वना देता रहता हूं । दूर गाना के बोल तेरी वफा तो एक सितम है.... बार-बार तुम्हारी यादों में मुझे लेकर चली जा रही है । फिर याद आया मैं गाना नहीं सुनता । मुझे गाना सुनने का कोई शौक नहीं । या यूँ कह लो मुझे सुनने सुनाने वाला कभी कोई मिला ही नहीं । लेकिन आज पता नहीं दूर बज रहा गाना में मैं तुम्हें ही देख रहा हूं, सुन रहा हूं, समझ रहा हूं और तुमसे ही बातें किए जा रहा हूँ ।
छत की ठंडी हवा के झोंके मन को राहत का संदेश दे रहा है, अच्छा भी लग रहा है लेकिन तुम्हारी याद !!! इधर उधर पलट कर लेटने की कोशिश करता हूं उसमें भी एक बेचैनी से झलकती है । मन में बहुत सारी बातें तुमसे करनी थी, कहनी थी, सुननी थी आये जा रहा है । यूं समझो लो कि जब हर तरफ तुम ही दिख रही थी और मैं इधर कहानी बनाते जा रहा, लिखते जा रहा, गुनगुनाते जा रहा था तब ना जाने कहां से यह शैतान मोबाइल बज उठा ।
मीठी यादों की तंद्रा में से मैं निकल आया । तुम कहीं दूरररर छूट गई । गाना का बोल अभी भी कानों से टकरा रही है लेकिन मैंने लिखना बंद कर दिया । काश यह फोन अभी न बजती तो आज मैं तुमसे बातें करते ना जाने कितनी लंबी कहानियां लिख देता ।
दूर गाना का बोल अब बदल गया है । आयेगी हर पल तुझे मेरी याद । लेकिन यहाँ तो उल्टा है हर पल मुझे तुम्हारी याद आती है ।
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